1857 की क्रांति के ‘खोए हुए’ वीरों को पहचान देगा यह संग्रहालय

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मेरठ । अंग्रेजों के खिलाफ 1857 के विद्रोह को समर्पित एकमात्र संग्रहालय – मेरठ का शहीद स्मारक – अब उन स्वतंत्रता सेनानियों की भूमिका की पहचान करेगा और सम्मान देगा “जिनके नाम समय की धूल में खो गए थे”। नवनिर्मित संग्रहालय में 10 मई, 1857 को मेरठ में हुए विद्रोह के दृश्यों को दर्शाने वाली कई गैलरी हैं।

संग्रहालय को हाल ही में लखनऊ के अभिलेखागार विभाग से 1,500 दस्तावेज प्राप्त हुए हैं। दस्तावेजों में उन हजारों ग्रामीणों के नाम का उल्लेख है, जिन पर ब्रिटिश शासन के दौरान विभिन्न अदालतों द्वारा मुकदमा चलाया गया और उन्हें सजा सुनाई गई। पहचान के बाद उन्हें मरणोपरांत उनके गांवों में राज्य द्वारा सम्मानित किया जाएगा।

कायाकल्प परियोजना की सलाहकार समिति के सदस्य और “1857: ए लिविंग हिस्ट्री” पुस्तक के लेखक अमित पाठक ने कहा, “ये दुर्लभ दस्तावेज हैं जिन्हें आम जनता ने कभी नहीं देखा है। वे मुख्य रूप से उन लोगों के खिलाफ 1857 के मुकदमे से संबंधित हैं जो अंग्रेजों की ताकत के खिलाफ खड़े हुए थे। उनकी पहचान वर्षों में खो गई थी क्योंकि उन दिनों किसी ने भी उनके बारे में बोलने या लिखने की हिम्मत नहीं की थी।”

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