इस्तीफे के बाद दिनेश खटीक के सियासत पर मंडराया संकट

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मेरठ । मेरठ हस्तिनापुर सीट से भाजपा विधायक, राज्यमंत्री दिनेश खटीक की राजनीति में राह अब आसान नहीं होगी। सामान्य जनाधार के बावजूद केवल दलित चेहरा होने के कारण दिनेश खटीक को भाजपा ने राज्यमंत्री का दर्जा दिया। लगातार विवादों में रहने के बाद भी पार्टी ने दिनेश को 2022 में विधायकी का टिकट दिया।

इस्तीफा देकर दिनेश ने दोबारा दलित होने का दांव चला है। मगर अब राज्यमंत्री का ये दलित कार्ड पार्टी में नहीं चल सकेगा। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष पर आरोप लगाकर इस्तीफा देने से दिनेश खटीक का राजनीतिक भविष्य खतरे में पड़ सकता है।

दिनेश का इस्तीफा भी खास रहा। इसमें दलित होने पर खास जोर दिया गया। मंत्री ने इस्तीफे की चिट़ठी में 14 बार ‘दलित’ शब्द का प्रयोग किया। लेटर में दलितों की राजनीति, दलितों के शोषण को मुद्दा बनाया है। साफ है कि दिनेश को दलित चेहरा होने के कारण ही मंत्री बनाया गया था। दिनेश उसी जाति का फायदा उठाकर सरकार पर दवाब बनाना चाहते हैं।

मंत्री दिनेश खटीक ने इस्तीफे की चिट़्ठी में लिखा, ”दलित होने की वजह से अफसर मेरी बिल्‍कुल नहीं सुनते। अभी तक विभाग में मुझे कोई काम तक नहीं मिला है। दलित समाज का राज्य मंत्री होने के कारण उनके किसी भी आदेश पर कोई कार्रवाई नहीं की जाती है। न ही उन्‍हें सूचना दी जाती है कि विभाग में कौन-कौन सी योजनाएं चल रही हैं। उन पर क्या कार्यवाही हो रही है? यूपी सरकार के अफसर दलितों को अपमान कर रहे हैं।”

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