कृषि स्नातक बनेंगे किसानों के लिए ड्रोन का सहारा 

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मेरठ । छिड़काव समेत विभिन्न कृषि कार्यों में ड्रोन के बढ़ते प्रयोग और इसके लाइसेंस के लिए कृषि स्नातक की डिग्री की बाध्यता में चौधरी चरण सिंह विवि के कॉलेज मददगार हो सकते हैं। विवि से प्रति वर्ष डेढ़ हजार से अधिक कृषि स्नातक निकलते हैं। कॉलेजों में कृषि की पढ़ाई में छात्रों का रुझान भी बढ़ रहा है। कृषि विवि में बीएससी एग्रीकल्चर की 140 सीटों पर दस गुना अधिक तक आवेदन होते हैं। प्रतिवर्ष कृषि विवि एवं कॉलेजों से तैयार हो रहे कृषि स्नातकों के लिए भी ड्रोन लाइसेंस रोजगार का नया माध्यम बन सकता है।

ड्रोन का लाइसेंस पाने के लिए अभ्यर्थी का कृषि स्नातक होना जरूरी है। किसानों के पास यह डिग्री नहीं होने से विभिन्न जिलों में ड्रोन के लाइसेंस नहीं मिल पा रहे। ऐसे में कृषि स्नातक उत्तीर्ण छात्र किसानों के लिए ड्रोन की उपलब्धता में सहायक हो सकते हैं। इससे कृषि स्नातकों के लिए रोजगार के विकल्प भी बनेंगे।

चौधरी चरण सिंह विवि और कृषि विवि दोनों में ही कृषि शिक्षा में पढ़ाई के प्रति छात्रों का रुझान बढ़ा है। सीसीएसयू में बीएससी एजी की 2477 सीटें हैं और प्रवेश के लिए 10 हजार से अधिक आवेदन हैं। यानी हर सीट पर चार छात्रों के बीच मुकाबला है। कृषि विवि में बीएससी एजी की 140 सीटें हैं। यहां भी प्रतिवर्ष प्रवेश परीक्षा में सीटों से दस गुना तक आवेदन आते हैं।

 

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