मेरठ के 4 साहित्यकारों को हिंदी साहित्य संस्थान पुरस्कार मिलेगा

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मेरठ । उप्र हिंदी संस्थान द्वारा इस साल के साहित्य पुरस्कार विजेताओं की सूची जारी कर दी गई है। इस सूची में मेरठ के 4 साहित्यकारों ने स्थान बनाया है। पहला नाम किशन स्वरूप और दूसरा शिवानंद सिंह सहयोगी का है। दोनों को साहित्य भूषण सम्मान के लिए चुना गया है। ढाई लाख रुपए प्रदान किए जाएंगे। युवा लेखन में अरुण कुमार मानव को (35 वर्ष तक के लेखकों के लिए) मिला है।

चौथा नाम आईजी प्रवीण कुमार का है। उन्हें विजयदेव नारायण साही पुरस्कार से नवाजा जाएगा। यह पुरस्कार कविता वह एक और मन के लिए मिला है। सम्मान सीएम योगी आदित्यनाथ द्वारा प्रदान किया जाएगा।

मेरठ रेंज के आईजी प्रवीण कुमार को विजयदेव नारायण साही पुरस्कार प्रदान किया जाएगा। यह सम्मान उनके काव्य संग्रह वह ‘एक ओर मन’ के लिए प्रदान किया जा रहा है। आईजी ने सोशल मीडिया पर उप्र हिंदी संस्थान का कोटिश: आभार प्रकट करते हुए धन्यवाद दिया है।

आईजी प्रवीण कुमार एक कुशल आईपीएस अफसर हैं। उनकी जिदंगी का एक पहलू साहित्य से जुड़ा है। सख्त पुलिस अधिकारी होने के साथ कानून की किताबें लिखने का शौक है। स्नातक के बाद से वो लगातार लिख रहे है।उन्हें कानून की किताबें लिखने का शौक है। एक किताब पहले छप चुकी है और दूसरी किताब रेवन्यू लॉ पर लिख रहे हैं। उनकी किताब ‘वह एक और मन’ गत वर्ष 15 अगस्त को प्रकाशित हुई थी। उनका कहना है साहित्य सृजन आगे भी चलता रहेगा।

मेरठ के वरिष्ठ कवि और साहित्यकार किशन स्वरूप को उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से साहित्य भूषण सम्मान से नवाजा जाएगा। मेरठ के मंगलपांडे नगर में रहने वाले किशन स्वरूप की अब तक 32 किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं। अब उप्र हिंदी साहित्य संस्थान ने उन्हें साहित्य भूषण सम्मान के लिए चुना है।

किशन स्वरूप अपनी साहित्यिक यात्रा को स्मरण करते हुए कहते हैं कॉलेज के दिनों में कवि गोपालदास नीरज का शिष्य रहे हैं। 1993 में मेरी पहली किताब संबोधन का प्रकाशन हुआ। इसका विमोचन मैंने अपने गुरु गोपालदास नीरज से ही कराया था। विमोचन समारोह देहरादून में हुआ था।

मेरठ के शिवानंद सहयोगी को साहित्य भूषण सम्मान से नवाजा जाएगा। सम्मान उनके काव्य संग्रह एक शून्य के लिए प्रदान किया जाएगा। जीवन की हलचल, गांव वाला घर, समय की पुकार, मां जीत ही जाएगी, बिखरा आसमान के अलावा घर मुंडेर की सोन चिरैया, दुमदार दोहे, मेरे गीतों का पाथेय संग्रह, यादों के पंछी, कुंडलियों का गांव, सूरज भी क्यों बंधक काफी सराही गई थी। 25 से अधिक किताबें लिख चुके हैं। ई-पत्रिकाओं से भी जुड़े हैं। उनके गीत और नवगीत प्रकाशित हो चुके हैं। उनको टोंटी वाला नल और यह तो सच है प्रकाशित होने वाला है।

अरुण कुमार मानव को डॉ रांगेय राघव पुरस्कार के लिए चुना गया है। अरुण को यह पुरस्कार उनकी पुस्तक आजाद हवायें के लिये मिला है। उनको पुरस्कार राशि के रुप में चालीस हजार रुपए की धनराशि दी जाएगी।

 

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